राष्ट्रपति की शक्तियां

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राष्ट्रपति

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अक्सर हमारे मन में यह प्रश्न उठता है राष्ट्रपति को संविधान के द्वारा कौन-कौन सी शक्तियां प्राप्त है जिसका वह उपयोग कर सकते है। तो आइए जानते हैं राष्ट्रपति को भारत के संविधान के द्वारा कौन-कौन सी शक्तियां प्राप्त है।

राष्ट्रपति को भारत के संविधान द्वारा प्राप्त शक्तियां निम्नलिखित हैं I

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राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियां (Executive Powers)

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  • संघ की समस्त कार्यपालिका शक्तियों का प्रयोग राष्ट्रपति के नाम से किया जाता है तथा राष्ट्रपति कार्यपालिका का प्रमुख होता है।
  • राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है तथा प्रधानमंत्री की सलाह से मंत्रियों की नियुक्ति करता है।
  • मंत्री राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यन्त  अपने पद पर रहते हैं।
  • राष्ट्रपति कार्यपालिका के कार्यों के संचालन के लिए नियम विनियम बना सकता है।
  • राष्ट्रपति मंत्रियों के बीच कार्यों का विभाजन करता है।
  • राष्ट्रपति प्रधानमंत्री से सूचनाएं मांग सकता है।
  • राष्ट्रपति राज्यपालों (Governor) की नियुक्ति करता है।
  • राष्ट्रपति केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) में प्रशासकों  (Lieutenant Governor) की नियुक्ति करता है।
  • राष्ट्रपति  केंद्र-राज्य और अंतर-राज्य सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक अंतरराज्यीय परिषद (Inter-State Council) की नियुक्ति कर सकते है।
  • राष्ट्रपति अनुसूचित क्षेत्र के रूप में घोषित कर सकते  है और अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में शक्तियां भी प्राप्त है ।
  • राष्ट्रपति महान्यायवादी (Attorney General) की नियुक्ति करता है।
  • राष्ट्रपति CAG (भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक) की नियुक्ति करता है I

राष्ट्रपति निम्नलिखित आयोगों के सदस्यों की उन्नति करता है :

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राष्ट्रपति की संवैधानिक आयोग (Constitutional Commission) :

  • निर्वाचन आयोग (Election Commission)
  • वित्त आयोग (Finance Commission)
  • संयुक्त लोक सेवा आयोग (Union Public  Service Commission)
  • अनुसूचित जाति आयोग (SC Commission)
  • अनुसूचित जनजाति आयोग (ST Commission)
  • अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC Commission)

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राष्ट्रपति की वैधानिक आयोग (Statutory Commission) :

  • मानवाधिकार आयोग (Human Rights Commission)
  • सूचना आयोग (Information Commission)
  • महिला आयोग (Women’s Commission)
  • अल्पसंख्यक आयोग (Minority Commission)
  • सतर्कता आयोग (Vigilance Commission)

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राष्ट्रपति की विधायी शक्तियां (Legislative Powers)

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  • राष्ट्रपति सदनों  के सत्रों  को आहूत करता है तथा उसका सत्रवासन करता है।
  • राष्ट्रपति लोकसभा को भंग कर सकता है।
  • राष्ट्रपति दोनों सदनों की सयुक्त  बैठक बुलाता है।
  • राष्ट्रपति सदन में संदेश भेज सकता है तथा अभिभाषण दे सकता है तथा विशेष अभिभाषण देता है।
  • राष्ट्रपति राज्यसभा के 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकता है।
  • यदि राजसभा के सभापति और उपसभापति दोनों का पद रिक्त हो तो राष्ट्रपति अस्थाई सभापति नियुक्त कर सकता है। 
  • यदि लोकसभा में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष दोनों का पद रिक्त हो तो राष्ट्रपति अस्थाई अध्यक्ष नियुक्त कर सकता है।
  • सांसदों  की योग्यता का निर्णय राष्ट्रपति लेता है चुनाव आयोग की परामर्श से।
  • कुछ विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से पेश किए जाते हैं जैसे कि धन विधेयक , नए राज्य के  गठन का विधेयक।
  • राष्ट्रपति की सहमति के बाद ही कोई विधायक अधिनियम बनता है।
  • जब कोई विधेयक राष्ट्रपति के समक्ष आता है उसके पास तीन विकल्प होते हैं – अपनी समिति दे दे ,  समिति को रोक ले , पुनर्विचार के लिए लौटा दे।
  • राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकते हैं (अनुच्छेद 123)
  • राष्ट्रपति CAG, वित्त आयोग , UPSC आदि के प्रतिवेदन (Report) को संसद में पेश करते हैं।
  • राष्ट्रपति निम्न केंद्र  शासित प्रदेशों में शांति ,  विकास वा अच्छे शासन के लिए नियम विनियम बना सकते हैं –  अंडमान निकोबार दीप समूह , दादर और नगर हवेली , दमन एंड दीव , लक्ष्यदीप (यदि पुडुचेरी में विधानसभा भंग हो तो उसके लिए भी राष्ट्रपति कानून बना सकते हैं)। 

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राष्ट्रपति की वित्तीय शक्तियाँ (Financial Powers)

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  • बजट राष्ट्रपति की ओर से पेश किया जाता है।
  • धन विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से पेश किया जाता है
  • अनुदान की मांग राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से पेश की जाती है I
  • वित्त आयोग के सदस्यों हर 5 साल पर  नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।
  • संघ की आकस्मिक  निधि राष्ट्रपति के अधीन होती है।

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राष्ट्रपति की नायक शक्तियाँ (Judicial Powers)

rastrapati ki shaktiya

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  • राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट तथा हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है।
  • राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट की सलाह ले सकता है कोई भी कानूनी मसला  सामने आने पर
  • राष्ट्रपति क्षमादान भी कर सकता है।

निम्न मामलों में राष्ट्रपति क्षमादान की शक्तियों का प्रयोग कर सकता है –

  1. यदि सैन्य  न्यायालय ने किसी व्यक्ति को दंडित किया है।
  2. यदि किसी व्यक्ति को संगी कानून के उल्लंघन के लिए दंडित किया गया है।
  3. सभी मामलों में जहां सजा मौत की सजा है।

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राष्ट्रपति की क्षमा शक्ति (Pardoning Power of the President)

Pardon (माफी)

इसके तहत व्यक्ति को पूर्णता क्षमा दिया जाता है। अर्थात व्यक्ति अपराध पूर्व स्थिति में आ जाता है सजा के कारण आई अयोग्यताएं भी समाप्त हो जाती हैं।

Commutation (लघुकरण)

इसमें व्यक्ति की सजा की प्रकृति को बदल दिया जाता है। उदाहरण के लिए मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल देना या फिर कठोर कारावास को साधारण कारावास में बदल देना। 

Remission (परिहार)

इसमें सजा की अवधि को कम कर दिया जाता है।  जैसे अगर सजा 8 साल की हुई है तो उसको बदलकर 4 साल कर दिया किया जा सकता है। 

Respite (विराम)

इसमें सजा की अवधि को कम कर दिया जाता है साथ ही साथ सजा की प्रकृति को भी बदल दिया जाता है।  जैसे 8 साल के कठोर कारावास को 5 साल के साधारण कारावास में बदला जा सकता है I इसका  प्रयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाता है।

Reprieve ( प्रविलम्ब )

इसमें राष्ट्रपति  तात्पर्य अस्थायी अवधि के लिए विशेष रूप से मृत्यु की सजा के निष्पादन पर रोक लगा देते है। इसका उद्देश्य यह है कि कन्वेंशन को राष्ट्रपति से Pardon (माफी)  या Commutation (लघुकरण) प्राप्त करने का समय मिल सके।

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राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियां (Military Powers)

  • राष्ट्रपति तीनों सेनाओं का प्रमुख होते हैं I
  • राष्ट्रपति युद्ध की घोषणा करते हैं तथा युद्ध विराम करते हैं I

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राष्ट्रपति की कूटनीतिक शक्तियां (Diplomatic Powers)

  • अन्य देशों के साथ सभी संध्या समझौते आदि राष्ट्रपति के नाम से किए जाते हैं I
  • अन्य देशों में हमारे राजदूत एवं उच्च आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं I

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राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां (Emergency Powers)

राष्ट्रपति तीन प्रकार के आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं जो कुछ इस प्रकार है –

  • राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352)
  • राज्यों में आपातकाल – राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356)
  • वृतीय आपातकाल (अनुच्छेद 360)

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राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) – National Emergency

  • भारत की सुरक्षा या इसके एक हिस्से को युद्ध या बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह का खतरा हो।
  • राष्ट्रपति के द्वारा  केवल कैबिनेट से एक लिखित सिफारिश प्राप्त करने के बाद।
  • अभिव्यक्ति में 44 वें संशोधन द्वारा आंतरिक अशांति को सशस्त्र विद्रोह द्वारा बदल दिया गया था। 

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राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) – President Rule

  • यदि राष्ट्रपति की राय हो  कि किसी विशेष राज्य की सरकार संविधान के अनुसार कार्य नहीं कर सकती है राज्य में संवैधानिक मशीनरी के टूटना से ।
  • यह राज्यपालों की रिपोर्ट के आधार पर या इसके बिना भी किया जा सकता है I

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वृतीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) – Financial Emergency

यदि राष्ट्रपति को लगता है कि कुछ ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हुई हैं जिनके द्वारा भारत या उसके एक हिस्से को वित्तीय स्थिरता का खतरा है , तो राष्ट्रपति  विशेष आपातकाल को लगा सकते है।

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राष्ट्रपति की वीटो शक्तियां

1.आत्यंतिक वीटो (Absolute Veto)

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यदि राष्ट्रपति किसी विधेयक पर अपनी सहमति नहीं देता है अर्थात असुविकार कर दे। समानता यहाँ  दो स्थितियों में प्रयोग किया जाता है – यदि कोई निजी विधेयक हो  या फिर मंत्रिपरिषद बदल जाए।

2. Suspensive Veto (निलंबनकारी वीटो )

अगर  राष्ट्रपति किसी विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा देता है तो इसे निलंबनकारी वीटो कहते हैं क्योंकि राष्ट्रपति कुछ  समय के लिए विधायक को निलंबित कर सकते हैं।

अगर संसद उसे विधायक को पुनः पारित करती है तो राष्ट्रपति उस पर अपनी सहमति देनी होती है , राष्ट्रपति केवल एक बार विधायक को पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं।

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3. जेब वीटो (Pocket Veto)

किसी विधेयक पर हस्ताक्षर करने के लिए राष्ट्रपति समय सीमा से बंधे नहीं होते हैं। अतः राष्ट्रपति किसी विधेयक पर नासहमति दे ना उसे अस्वीकार  करें ना ही उसे पुनर्विचार के लिए लौटाए तथा विधेयक केवल राष्ट्रपति की टेबल पर पढ़ा रहे  बिना किसी प्रतिक्रिया के इसे हम पॉकेट वीटो कहते हैं।

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राष्ट्रपति के अध्यादेश (Ordinace) पारित करने की शक्ति

  • अध्यादेश पारित करने की शक्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद 123 में है जिसे कि राष्ट्रपति द्वारा पारित किया जा सकता है।
  • यदि सरकार को तत्काल किसी कानून की आवश्यकता है तथा संसद के दोनों सदन सत्र में नहीं है तो इस स्थिति में राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकते है।
  • अध्यादेश एक अस्थाई कानून है।
  • अध्यादेश संसद कानून की भाती ही प्रभावी होता है।
  • अध्यादेश द्वारा किसी संसदीय कानून में संशोधन किया जा सकता है।
  • अध्यादेश का भूतलक्षी (Retrospective) क्रियान्वयन भी किया जा सकता है।
  • अध्यादेश से संविधान में संशोधन नहीं किया जा सकता है।

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अध्यादेश (Ordinace) किन परिस्थितियों में जारी हो सकता है

  • यदि संसद के दोनों सदन सत्र में नहीं है तो अध्यादेश जारी किया जा सकता है।
  • यदि एक सत्र सदन सत्र में है और दूसरा नहीं है तो इस दशा में भी अध्यादेश जारी किया जा सकता है।
  • यदि दोनों सदन सत्र में हैं तो अध्यादेश जारी नहीं किया जा सकता है।

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अध्यादेश (Ordinance) लागू करने की अवधि :

  • संसद के दोनों सदनों के सत्र आरंभ होने के बाद 6 सप्ताह तक अध्यादेश लागू रहता है उसके बाद या स्वता समाप्त हो जाता है।
  • अध्यादेशलागू रहने के दौरान किए गए कार्य वैधानिक होते हैं।

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Shivanshu Mehta

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