जैविक खेती (Organic Farming) में कृमि कम्पोजिट (Vermi Composite) की मुख्य भूमिका व लाभ

कृमि कम्पोजिट (Vermi Composite) की मुख्य भूमिका जैविक खेती ( Organic Farming) में :-

सभ्यता के आरंभ में मनुष्य एक शिकारी प्राणी था , जिसका जीवन शिकार  के ऊपर निर्भर रहता था । उत्तरोत्तर सभ्यता का विकास होता चला गया और मनुष्य शिकार के साथ-साथ पशुपालन और कृषि पर आश्रित होने लगा। प्रारंभ में कृषि के लिए उपजाऊ जमीन प्रकृति ने हमें उपहार स्वरूप दिया था । कृषि के कारण मनुष्य धीरे धीरे स्थायी होने लगे और नगरों की संख्या बढ़ने लगी । फिर उसके भरण पोषण हेतु कृषि पर अत्यधिक बल दिया जाने लगा ।

इस हेतु धीरे- धीरे उत्पादन बढ़ाने के लिए खाद डाला जाने लगा निरंतर खाद डाले जाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति में कुछ ह्रास (खराब होना) भी होने लगा । लोग अत्यधिक कृषि के उत्पादन बढ़ाने के लिए खादों का अंधाधुन उपयोग करने लगे जिससे उर्वरकता में कमी आने लगी और जमीन बंजर होने लगे । प्रकृति का एक सामान्य नियम है कि अगर प्रकृति से छेड़छाड़ ना हो तो प्रकृति जो अपशिष्ट (बेकार) पैदा करती है उसकी सफाई भी स्वयं ही करती है। और यही अपशिष्ट(बेकार)  प्रकृत में रहने वाले तथा उस पर निर्भर रहने वालों के लिए वरदान सिद्ध हो जाती है। लेकिन देश में बढ़ती जनसंख्या और उस पर निर्भर प्राणियों की उदर पूर्ति (पेट की आपूर्ति ) के लिए आज केवल प्रकृति से काम नहीं चल पा रहा है ।  

जैविक खेती (Organic Farming ) के फायदे :-

इसलिए वैज्ञानिकों ने कृमि कंपोस्ट (vermi composite )  की ऐसी मानवीय प्रक्रिया विकसित की जिससे मृदा प्रदूषण तो कम हो ही उसके साथ उत्पादकता में भी वृद्धि हो ,  इसलिए कृमि कंपोस्टिंग को उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रकृति के सापेक्ष व  अनुरूप सकारात्मक पहलू पर बल दिया जाता है । कृमि कंपोस्टिंग से जहां खाद्य फसलों , अनाज , फल इत्यादि की पौष्टिकता भी नहीं नष्ट होती है वहीं दूसरी ओर  मृदा की उर्वरता में क्षरण भी नहीं होता है ।

orgainic farming vermi composite

जैविक खेती (Organic Farming ) निम्न सरल माध्यम से शुरू की जा सकती , स्वस्थ एवं निरोगी जीवन जीने में इसके लाभ :-

प्रकृति में कार्यरत विधियों को हम भी अपना सकते हैं सभी मृत और सूखे पत्तों और कहानियां को पहले केंचुए और कीड़े- मकोड़े तथा बाद में जीवाणु और कवक विघटित (Fungi Dissolve)  करके मिट्टी जैसा काला और समृद्ध पदार्थ बनाते हैं, जिसे कंपोस्ट कहते हैं । मिट्टी के यह प्राणी कार्बन वस्तुओं का उपयोग भोजन के रूप में करते हैं जिससे उन्हें वृद्धि और कार्यकलाप के लिए पोषक तत्व मिलते हैं। यह पोषक तत्व फिर मिट्टी में वापस आ जाते हैं जिनको पेड़ और अन्य पौधे ग्रहण करते हैं यह प्रक्रिया प्रकृत में पोषक तत्व का पुनर चालन कहलाती है ।

स्वस्थ एवं निरोगी जीवन जीने में इसके लाभ :-

 मिट्टी का उपयोग खेतों और बागों में खाद के रूप में किया जा सकता है। इस खेती से होने वाले उत्पात से मनुष्यों का किसी भी प्रकार से नुकसान नहीं होता। वर्तमान में खेतों में यूरिया के अधिक उपयोग के कारण भौज्ययुक्त पदार्थ जहर सदृश्य प्रतीत होते जा रहे हैं जिससे कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक बीमारियां उत्पन्न हो रही है। लेकिन अगर हम थोड़ा सा प्रकृति के प्रति जागरूक हो जाए और जैविक कृषि (Organic Farming) आधारित खादों का उपयोग करें तो इन सब समस्याओं से बचा जा सकता है और अपने आने वाली पीढ़ी के लिए एक अच्छा ,स्वास्थ्य और पोषण युक्त भोजन दें सकते हैं।

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 प्रस्तुत है जैविक कृषि (organic farming)  कृमि कंपोस्टिंग बनाने की विधि । कृमि कंपोस्टिंग बनाने के कुछ चरण होते हैं, जिसे हम आसानी से लगभग डेढ़ महीने में तैयार कर सकते हैं:-

  • प्रथम चरण :- लगभग आधा मीटर लंबा और चौड़ा तथा 1 मीटर गहरा गड्ढा खोदिए
  • दुसरा चरण :- उस गढ़े में खरपतवार  , सूखे पत्ते और घास बिछाइये I
  • तीसरा चरण :- कार्बनिक अपशिष्ट जब भी पैदा हो गड्ढे में उसके लाए जाने की व्यवस्था कीजिए
  • चोथा चरण :- इसमें व्यवसायिक स्तर पर पैदा किए जा रहे कीड़े , केंचुए आदि डालिए
  • पांचवां चरण :- ध्यान रहे कि इन वस्तुओं को प्रतिदिन सूखे पत्तों और मिट्टी से ढका जाए गड्ढे को नम रखने के लिए सप्ताह में एक या दो बार पानी डालिए I
  • छठा चरण :- लगभग 45 दिनों में यह कचरा सूक्ष्म प्राणियों की क्रिया के कारण विघटित हो जाएगा यह मिट्टी उपजाऊ और पोषक तत्वों से समृद्ध होगी ‌।

जैविक कृषि (Organic Farming) कृमि कंपोस्टिंग के लाभ :-

  • इसका उच्च आर्थिक मूल्य है।
  • यह पौधे की वृद्धि के लिए मृदा कंडीशनर के रूप में कार्य करता है।
  • यह खनिज संतुलन को बढ़ाता है।
  • यह पोषक तत्वों की उपलब्धता में सुधार करता है।
  • इससे पर्यावरणीय समस्याओं में कमी आएगी।
  • यह रोगजनक सूक्ष्मजीवों में कमी लाने में मदद करेगा।
  • यह गरीब किसानों के लिए एक उपयोगी कुटीर उद्योग हो सकता है।
  • यह किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत हो सकता है।
  • यह रोजगार के अधिक अवसर पैदा करेगा।

इसको अंग्रेजी में भी पढ़े – vermi compositing

Ambuj Sahay

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