क्या है तबलीगी जमात और मरकज

तबलीगी जमात

तबलीगी का  उर्दू में अर्थ  होता है कि जो अल्लाह ने कहा है ,उसकी कही बातों और शिक्षाओं का घूम-घूम कर प्रचार और प्रसार करना। तबलीगी जमात का अर्थ होता है समाज यानी  लोगों का ऐसा समुह जो किसी विशेष उद्देश्य के लिए कार्य करता है तथा मरकज को हम केंद्र अर्थात मुख्य प्रचार प्रसार का स्थान समझ सकते हैं। अर्थात ऐसा स्थान जहां से इनकी सारी गतिविधियों को संचालित किया जाता है।

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मरकज

मार्काज़ का शाब्दिक अर्थ है सभा स्थल। तब्लीगी जमात पारंपरिक इस्लाम को मानती है और उसका प्रचार करती है।

इज्तेमा (ijtema) क्या होता है

इज्तेमा तबलीगी जमात का एक बहुत ही विशेष उपक्रम है, जिससे मुसलमान अपनी बुनियादी शिक्षा पर लौटने को प्रेरित होते  हैं। इज्तेमा एक तीन दिवसीय सम्मेलन है जिसमें मुस्लिम बड़ी संख्या में भाग लेते हैं, न केवल आम मुसलमान बल्कि इस्लामिक विद्वान, अलीम आदि भी यहां एकत्रित होते हैं।

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तबलीगी जमात के कार्य :

मरकज की स्थापना के पीछे क्या हेतु है इसको समझने के लिए हमें कुछ विषय बिंदुओं  को समझना पड़ेगा। यानी कि तबलीगी जमात की स्थापना के पीछे उनका क्या एजेंडा  है। इसको हम निम्न वर्गीकरण के द्वारा समझ सकते हैं।

  • लोगों को जमात द्वारा यह-घूम घूम कर यह समझाना की अल्लाह के ऊपर भरोसा करो।
  • नमाज पढ़ने के लिए प्रेरित करना I
  • इल्म यानी केवल मुस्लिम धर्म की बातें करना I
  • इकरामे मुस्लिम अर्थात मुसलमानों को आपस में एकजुट रखना अर्थात  एक दूसरे का  सम्मान करना एवं हर संभव मदद करना ।
  • इख्लाके नियत जिसका अर्थ होता है कि अपने नियत को साफ रखना I

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इसमें काम करने वाले अनुयायियों को रोजाना के कार्यों अर्थात गृहस्थी से दूर रह कर कुछ दिनों तक इस्लाम के प्रचार और प्रसार में लगाया जाता है। इसके लिए इस्लाम के अनुयायियों को अपने जीवन काल में कुछ समय देना अति आवश्यक रहता है। यह  3,5 या 10 दिनों तक होता है और कई बार तो चार-चार महीनों का होता है।

इस संगठन का खर्च इस्लाम के अनुयायियों के द्वारा किए गए मदद के आधार पर होता है। भारत में कभी-कभी इस कार्य हेतु कुछ सरकारें भी मदद किया करती हैं। इसके अलावा विदेशों खासकर अरब मुल्कों से पैसा आता है।

तब्लीगी जमात का इतिहास

यहां कहानी शुरू होती है जब भारत में  उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध और बीसवीं सदी के शुरुआत होते-होते अंग्रेजों ने कई लोगों को क्रिस्चियन धर्म में कन्वर्ट शुरू करना किया। हरियाणा के मेवात में जब अंग्रेज कुछ मुसलमानों को भी क्रिश्चियन धर्म में परिवर्तित कर दिए तब मुस्लिम समाज में हाहाकार मचने लगा।  इस घटना के बाद   इस्लाम धर्म में लोगों को अन्य मजहब में मतदान तृप्त होने से रोकने के लिए तबलीगी जमात मरकज की स्थापना 1927 में मोहम्मद इलियास कंधालवी द्वारा की गई थी । वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के कंधालवी गांव के रहने वाले थे । उनको इस्लाम में धार्मिक सुधारवादी नेता के तौर पर जाना जाता है तथा मुस्लिम समाज में  एक पैगंबर की भांति पूजा जाता है। हजरत निजामुद्दीन के प्रसिद्ध औलिया दरगाह के बगल में तबलीगी जमात मरकज की स्थापना 1927 में हुई थी । यह मरकज तबलीगी जमात का हेडक्वार्टर भी है ।

तबलीकी जमात का प्रभाव

  • तबलीकी जमात का विस्तार दुनिया के 203 देशों तक है।
  • तबलीकी जमात के प्रभाव क्षेत्र हैं: भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर I
  • तबलीकी जमात  संगठन के 150 से 250 मिलियन अनुयायियों के बीच होने का अनुमान है।
  • तबलीकी जमात  इस्लाम के सबसे प्रभावशाली धार्मिक अभियानों में से एक माना जाता है।

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Ambuj Sahay

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